धान खरीदी में गड़बड़ी, कांग्रेस ने सरकार पर लगाया घोटाले का आरोप, टारगेट से कम खरीदी, भुगतान अधूरा…!

बिलासपुर – जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष ने धान खरीदी के मुद्दे पर सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत किसानों के हितों के प्रति साफ नहीं है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी और 21 क्विंटल प्रति किसान धान खरीदने का वादा किया था, लेकिन यह वादा पूरा नहीं हुआ। किसानों को केवल 2300 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है।
इस बार 160 लाख मिट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य है सरकार किसानों से कम मात्रा में धान खरीदने की कोशिश कर रही है। धान खरीदी के लिए 14 नवंबर से 31 जनवरी तक का समय निर्धारित है, जिसमें सरकारी छुट्टियों और सप्ताहांत को घटाकर कुल 47 कार्यदिवस बचते हैं। इन दिनों में प्रति दिन करीब साढ़े तीन लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी करनी होगी, तभी तय लक्ष्य पूरा होगा। लेकिन सच्चाई यह है कि केंद्रों पर रोजाना के लिए तय लक्ष्य भी पूरा नहीं हो रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी की पिछली सरकार ने किसानों के साथ झूठे वादे किए और उन्हें छलने का काम किया। मौजूदा स्थिति में 21 क्विंटल धान खरीदने की बात तो दूर, कई जगहों पर सिर्फ 9, 11 या 15 क्विंटल ही धान खरीदा जा रहा है। किसानों को उनके धान का पूरा भुगतान नहीं मिल रहा, और जिन किसानों को मिल भी रहा है, वह अधूरा है।
आरोप लगाते हुए कहा धान की कीमत 3217 रु मे करें क्योंकि 3100 रु भाजपा ने अपने चुनावी वायदे मे कहा था। केंद्र सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 117 रु बढ़ा दिया है। इस कारण इस वर्ष धान की खरीदी 3100 रु से बढ़ाकर 3217 रु किया जाये। कांग्रेस के समय भी कांग्रेस ने धान का समर्थन मूल्य 2500 देने का वादा किया था लेकिन समर्थन मूल्य बढ़ने पर कांग्रेस ने 2640 रु मे धान खरीदी किया था। वहीं धान मिलिंग के लिए कांग्रेस सरकार ने प्रति क्विंटल 120 रूपये देने का निर्णय लिया था, जिसका परिणाम यह हुआ था कि प्रदेश भर मे 700 नई राईस मिलें खुली थी। अब सरकार ने मिलर के लिए 120 रूपए को घटाकर 60 रूपए कर दिया है इस लिए राईस मिलर हड़ताल पर है और धान सोसायटी मे जाम है।
पत्रकारों से प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस ने सरकार पर धान खरीदी में बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार न तो किसानों को समय पर टोकन दे पा रही है और न ही उन्हें धान बेचने का पूरा मौका मिल रहा है। टोकन मिलने के बाद भी समय पर खरीदी न होने के कारण किसानों का टोकन रद्द हो रहा है। कांग्रेस की धान खरीदी नीति को बदलकर, भाजपा सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है।




